
Hieronymus Bosch · The Garden of Earthly Delights by Bosch High Resolution.jpg · Wikimedia Commons
Oct 2022
मैंने ख़लिश से फर्द को,
और फर्द से ख़लिश को जाना है,
मैंने शर्म से फक्र को,
और फक्र से शर्म को जाना है,
मैंने स्याही से रक्त को,
और रक्त से स्याही को जाना है,
मैंने तपिश से सर्द को,
और सर्द से तपिश को जाना है,
मैंने जहन्नुम से स्वर्ग को,
और स्वर्ग से जहन्नुम को जाना है,
मैंने तबीयत से मर्ज को,
और मर्ज से तबियत को जाना है,
मैंने यकसानियत से फर्क़ को,
और फर्क़ से, मुमासलत को जाना है,
मैंने रूह से बदन को,
और बदन से , रूह को जाना है,
मैंने जीवन से मर्दन को,
और मर्दन से जीवन जाना है,
मैने शून्य से वक़्त को,
और वक़्त से शून्य जाना है,
मैंने अंत से अनंत को,
और अनंत से, अंत जाना है,
मैंने खुशी से दर्द को,
और दर्द से खुशी को जाना है,
मैंने कमी से भरपन को,
और भरपन से, कमी को जाना है,
मैंने ग़ुलामी से आजादी को,
और आजादी से, ग़ुलामी को जाना है,
मैंने होश से बेहोशी को,
बेफिक्री से जुनून को,
और जहालत से फितूर को जाना है,
मैंने, तुझसे बेखुदी को,
और बेखुदी से,
खुद को जाना है,
मैंने तुझसे सुकून जाना है।